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अमावस्या व्रत — महत्व, विधि और लाभ

By the Astroly Astrology Desk · Updated Sep 3, 2026 · 1 min read

अमावस्या व्रत — महत्व और विधि

अमावस्या व्रत पितृ व शनिदेव को समर्पित व्रत है, जो हर माह की अमावस्या (नव चंद्र) रखा जाता है। यह व्रत पितृ-शांति, दोष-निवारण और नकारात्मकता से मुक्ति के लिए किया जाता है।

श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल लाता है।

अमावस्या व्रत का महत्व

अमावस्या व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है — यह पितृ-शांति, दोष-निवारण और नकारात्मकता से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। पितृ व शनिदेव की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

अमावस्या व्रत की विधि

अमावस्या को पितरों का तर्पण करें, दान करें और स्नान-ध्यान करें। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें, दिनभर श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करें और शाम को व्रत कथा सुनकर विधि अनुसार व्रत खोलें।

व्रत के नियम

  • सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें
  • मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें
  • क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन से बचें
  • व्रत कथा सुनें और दान-पुण्य करें

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Frequently Asked Questions

अमावस्या व्रत कब रखा जाता है?

अमावस्या व्रत हर माह की अमावस्या (नव चंद्र) रखा जाता है।

अमावस्या व्रत किस देवता को समर्पित है?

अमावस्या व्रत पितृ व शनिदेव को समर्पित है।

अमावस्या व्रत रखने से क्या लाभ होता है?

अमावस्या व्रत से पितृ-शांति, दोष-निवारण और नकारात्मकता से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है।

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