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एकादशी व्रत — महत्व, विधि और लाभ

By the Astroly Astrology Desk · Updated Sep 3, 2026 · 1 min read

एकादशी व्रत — महत्व और विधि

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जो हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (माह में दो बार) रखा जाता है। यह व्रत पापों का नाश, मन की शुद्धि, मोक्ष और उत्तम स्वास्थ्य के लिए किया जाता है।

श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल लाता है।

एकादशी व्रत का महत्व

एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है — यह पापों का नाश, मन की शुद्धि, मोक्ष और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने वाला माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

एकादशी व्रत की विधि

व्रत में अन्न (चावल) का त्याग कर फलाहार करें और विष्णु का ध्यान करें। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें, दिनभर श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करें और शाम को व्रत कथा सुनकर विधि अनुसार व्रत खोलें।

व्रत के नियम

  • सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें
  • मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें
  • क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन से बचें
  • व्रत कथा सुनें और दान-पुण्य करें

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Frequently Asked Questions

एकादशी व्रत कब रखा जाता है?

एकादशी व्रत हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (माह में दो बार) रखा जाता है।

एकादशी व्रत किस देवता को समर्पित है?

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

एकादशी व्रत रखने से क्या लाभ होता है?

एकादशी व्रत से पापों का नाश, मन की शुद्धि, मोक्ष और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति मानी जाती है।

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