Home Kundali Ask Milan Profile

जन्माष्टमी व्रत — महत्व, विधि और लाभ

By the Astroly Astrology Desk · Updated Sep 3, 2026 · 1 min read

जन्माष्टमी व्रत — महत्व और विधि

जन्माष्टमी व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित व्रत है, जो भाद्रपद कृष्ण अष्टमी रखा जाता है। यह व्रत संतान सुख, पाप-नाश और कृष्ण कृपा के लिए किया जाता है।

श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल लाता है।

जन्माष्टमी व्रत का महत्व

जन्माष्टमी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है — यह संतान सुख, पाप-नाश और कृष्ण कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

जन्माष्टमी व्रत की विधि

मध्यरात्रि तक व्रत रखें, कृष्ण जन्म के बाद पूजा कर व्रत खोलें। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें, दिनभर श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करें और शाम को व्रत कथा सुनकर विधि अनुसार व्रत खोलें।

व्रत के नियम

  • सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें
  • मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें
  • क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन से बचें
  • व्रत कथा सुनें और दान-पुण्य करें

अपने लिए शुभ व्रत व मुहूर्त जानें

अपनी कुंडली अनुसार कौन-सा व्रत शुभ रहेगा? मुफ़्त कुंडली बनाएँ या ज्योतिषी से पूछें — Astroly.in पर।

Frequently Asked Questions

जन्माष्टमी व्रत कब रखा जाता है?

जन्माष्टमी व्रत भाद्रपद कृष्ण अष्टमी रखा जाता है।

जन्माष्टमी व्रत किस देवता को समर्पित है?

जन्माष्टमी व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

जन्माष्टमी व्रत रखने से क्या लाभ होता है?

जन्माष्टमी व्रत से संतान सुख, पाप-नाश और कृष्ण कृपा की प्राप्ति मानी जाती है।

Cast your free Janam Kundli — planets, houses, nakshatra & dasha 🔮 Ask a Jyotishi (AI) — instant answer to any question